ख्वाहिश थी के मुझे कोई दिल से चाहे
हर कोई भिड़ का हिसा था
हाथ थामना और साथ चलना तो दूर
ना मेरे जज़्बात समझा ना मेरे एहसास
हर किसी को अपनी फुर्सत से बात करनी थी
सबका अपना मकसद था
बेवज़ह नहीं आया कोई
ख़ुश नसीब है वो जिनको मिली है चाहत ज़िन्दगी में
ख्वाहिश थी के मुझे कोई दिल से चाहेSofiya
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