कहना था बहुत कुछ पर चुप रही शोर था अंदर, तूफ़ान था जो सब फ़ना कर देता थेहरा कैसे? गम के काले बादल फटने लगे, सैलाब सा बहता गया आँखों से दर्द जो था वो मुस्कान के पीछे छुपा था बाहर से लगता सब खुबसूरत है, मंज़र तो अंदर था जो सहना सके कहना था बहुत कुछ पर चुप रही Sofiya
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Showing posts from April, 2026
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तुझ से बात होती है तो सारे गम भूल जाती हूं इस भरी दुनिया में एक तू ही है जिससे बात करने को दिल चाहता है मुशरूफ़ लम्हों में तेरे थोड़े से वक़्त का इंतज़ार रहता है दिल करता है तेरे पास आ कर बैठू तेरी हर बात को सुनु जो किसी से ना कही हो तेरी आँखों में खुद को देखु एक सुकून सा लगता है जब तुझ से बात होती है Sofiya
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बात वक़्त मिलने की नहीं है, अहमियत कितनी है? बात सही है या गलत होने की नहीं है, साथ कितना है? मशरूफ़ रह कर भी दो पल बात हो सकती है, हाले दिल पूछते और बताते, फुरसत में तो हर कोई पास आता है, काश हम भी किसी के अपने होते, हमारे लिए भी मोहब्बत के लम्हे उन मशरूफ़ पलों में होते, ये ना कहते कल बात करते हैं अगर वक्त मिला तो बात वक़्त मिलने की नहीं, अहमियत कितनी है? Sofiya