ये कोई इत्तेफाक तो नहीं,
खुदा की ही मर्जी है,
किसी बहाने से मिलवाया तो है,
शायद मेरी ख्वाहिश थी कोई एहसास की,
मशरफ़ हो कर भी, वक़्त की पाबन्दी है,
मिलो की दूरी है,
फ़िर भी मुझे महसूस करवा देता है मोहब्बत की सीमा नहीं है,
बस रूह का रूह से मिलना है
ये कोई इत्तेफाक तो नहीं
Sofiya
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