कहते हैं सबको दुख है, तो फिर सुखी कौन है? हर कोई अधूरा है, तो फिर पूरा कौन है? खामिया सब में है, तो फिर सिर्फ ख़ूबियों वाला कौन है? गिरना ज़रूरी है ऊपर उठने के लिए, तो फिर बिना गिरे कौन ऊपर है? दुश्मन सब के होते हैं, तो फिर सिर्फ अच्छे दोस्त कितने हैं? अगर हर इंसान किसी ना किसी दर्द और तकलीफ से भरा है, तो फिर क्यों ढूंढे उसे जो है ही नहीं? कोई दिल से अमीर है कोई जेब से, आओ बाँटे एक दूसरे के ग़म और तकलीफ़, सुलझ न सके पर सुन सके और समझ कर हाथ थाम ले कुछ हँसते, कुछ रोते, एक साथ पार करले सहारा बन, उजाला बन, सब ऊपर नीचे, गली नुक्कड़ वाले जिंदगी के रास्ते. Sofiya
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Showing posts from February, 2026
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जरूरी नहीं कि हर रिश्ता सोच समझ कर किया जाए कुछ लोग हमारी जिंदगी में ऐसे ही आ जाते हैं हम साथ चलने लगते हैं क्यू, कैसे, कब का अंदाज़ा ही नहीं खुशियाँ और गम बांटते हैं कभी कड़वा तो कभी मीठा सा रिश्ता बेनाम ही सही, पर रूह से रूह का रिश्ता दोस्ती से ऊपर, मोहब्बत से कम नहीं जरूरी नहीं नाम दिया जाए चलते चलते गहरा हो जाये कुछ रिश्ते यूं ही बन जाते हैं. Sofiya
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कहते हैं दर्द है ग़म है जिंदगी में पर कौन है ऐसा जिसको दर्द नहीं गम नहीं सब की अपनी तकलीफ़ है अपना फ़साना है खुशियों का तो आना जाना है, दर्द हर ज़माने में है वक्त तो उसके लिए होता है जो अहम है बाकी तो सब कहने की बातें हैं कि हम तेरे हैं किसी के लिए जरूरी तो किसी की ज़रुरत है कोई ना मेरा है ना तेरा है सब को दिल बहलाना है वक़्त ये गुज़ारना है ना हाथ पकड़ना है ना कदम से कदम मिला कर चलना है मुस्कुराते हैं तब भी जब दिल रोता है कहते हैं दर्द है ग़म है जिंदगी में Sofiya
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दिन में तुम याद आते हो मशरूफ कर देते हैं खुद को हम वक़्त और हालात की ज़ंजीरों में बंधे हैं पर ये शाम धीरे-धीरे सारे बंधन तोड़ने लगती है वापस तुम्हारी ओर खींचे तुम कहीं नज़र ना आए ये रात का सन्नाटा अकेलापन सताए , दिल घबराए मानो जैसे रुकते-रुकते सांसें आए आँखों से आँसू बहते जाए तुम्हारी याद जो आए Sofiya