जरूरी नहीं कि हर रिश्ता सोच समझ कर किया जाए

कुछ लोग हमारी जिंदगी में ऐसे ही आ जाते हैं
हम साथ चलने लगते हैं 
क्यू, कैसे, कब का अंदाज़ा ही नहीं
खुशियाँ और गम बांटते हैं 
कभी कड़वा तो कभी मीठा सा रिश्ता 
बेनाम ही सही, पर रूह से रूह का रिश्ता 
दोस्ती से ऊपर, मोहब्बत से कम नहीं
जरूरी नहीं नाम दिया जाए
चलते चलते गहरा हो जाये
कुछ रिश्ते यूं ही बन जाते हैं.
Sofiya

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