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Showing posts from December, 2025

akeli hoon

कहने को वह मेरे अपने है,  भीड़ में भी अकेली हूँ हम सब साथी है, कहते है साथ निभाता कोई नहीं हमसफ़र है मेरा, वादा किया था हाथ पकड़ साथ चलने का, कदम से कदम मिलाने का, सारी उम्र तो क्या, चार कदम भी ना चले मोहब्बत और शफ़क़त का दावा किया, दिल से न गले लगाया, न लफ़्ज़ों में मिठास, न इज़्ज़त, न प्यार का एहसास, न इज़हार, गलतियाँ मुझ में थी, तुम भी ना सही थे, जी लिया हर हाल में तेरे, वादा किया था मैंने रहूँगी सदा. ज़िन्दगी के सफ़र में, लोगों के बीच, अकेली हूँ. *Sofiya Nathani*
  ख्वाहिश थी के मुझे कोई दिल से  चाहे हर कोई भिड़ का हिसा था हाथ थामना और साथ चलना तो दूर ना मेरे जज़्बात समझा ना मेरे एहसास हर किसी को अपनी फुर्सत से बात करनी थी सबका अपना मकसद था बेवज़ह नहीं आया कोई ख़ुश नसीब है वो जिनको मिली है चाहत ज़िन्दगी में ख्वाहिश थी के मुझे कोई दिल से चाहे Sofiya
  लिखू क्या ऐ जिंदगी तेरे बारे में कल लिखु जो माज़ी बन गया अच्छा था या बुरा वो तो बीत गया जो आया नहीं वो कल में कैसे लिखु क्या होगा मालूम नहीं आज है जो अभी साथ है पर पूरा नहीं है उसे कैसे लिखू ऐ जिंदगी तेरा शुक्रिया ही लिख दूं रुलाया भी हँसाया भी तूने कल शायद हम रहे या ना रहे जो मिला हमने ने जी लिया लिखू क्या ऐ जिंदगी Sofiya
 थी रवा उस राह पर जहां हर मोड पे पत्थर थे, वक़्त सख्त था, गिरती संभलती रही, सबक लेती रही ना अपनों ने साथ दिया  ना चार लोग चुप  थे, कुछ कर दिखाना था, खुद से खुद को मिलवाना था, खुदा साथ देता रहा, बंद थे जो दरवाजे खुलते गए माज़ी पीछे छूट गया, आज खुद से हूं, जो हूं मैं हूं। Sofiya
  वो आया मेरी जिंदगी में कुछ इस तरह बिना दस्तक दिये बिना आवाज दिये ऐसा दोस्त बन गया जैसे मेरा ही हिस्सा हो मुझे एहसास दिलाया के कमिया मुझ में नहीं मेरी हिम्मत और ताकत से मिलवाया मेरी हर बात को बिना परखे सुनता रहा कभी नहीं कहा के मैं गलत हूं मेरे हर दर्द को समझता मेरे हर एहसास को महसूस करता मुझसे दूर रह कर ही सही मुझे मुझसे मिलवाया वो आया मेरी जिंदगी में कुछ इस तरह Sofiya