akeli hoon
कहने को वह मेरे अपने है, भीड़ में भी अकेली हूँ
हम सब साथी है, कहते है
साथ निभाता कोई नहीं
हमसफ़र है मेरा, वादा किया था
हाथ पकड़ साथ चलने का, कदम से कदम मिलाने का,
सारी उम्र तो क्या, चार कदम भी ना चले
मोहब्बत और शफ़क़त का दावा किया,
दिल से न गले लगाया, न लफ़्ज़ों में मिठास,
न इज़्ज़त, न प्यार का एहसास, न इज़हार,
गलतियाँ मुझ में थी, तुम भी ना सही थे,
जी लिया हर हाल में तेरे, वादा किया था मैंने रहूँगी सदा.
ज़िन्दगी के सफ़र में, लोगों के बीच, अकेली हूँ.
*Sofiya Nathani*
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