कहते हैं सबको दुख है,
तो फिर सुखी कौन है?
हर कोई अधूरा है,
तो फिर पूरा कौन है?
खामिया सब में है,
तो फिर सिर्फ ख़ूबियों वाला कौन है?
गिरना ज़रूरी है ऊपर उठने के लिए,
तो फिर बिना गिरे कौन ऊपर है?
दुश्मन सब के होते हैं,
तो फिर सिर्फ अच्छे दोस्त कितने हैं?
अगर हर इंसान किसी ना किसी दर्द और तकलीफ से भरा है, तो फिर क्यों ढूंढे उसे जो है ही नहीं?कोई दिल से अमीर है कोई जेब से, आओ बाँटे एक दूसरे के ग़म और तकलीफ़, सुलझ न सके पर सुन सके और समझ कर हाथ थाम लेकुछ हँसते, कुछ रोते, एक साथ
पार करले सहारा बन, उजाला बन, सब ऊपर नीचे, गली नुक्कड़ वाले जिंदगी के रास्ते.Sofiya
Comments
Post a Comment