कहना था बहुत कुछ पर चुप रही
शोर था अंदर, तूफ़ान था जो सब फ़ना कर देता
थेहरा कैसे?
गम के काले बादल फटने लगे,
सैलाब सा बहता गया आँखों से दर्द जो था वो मुस्कान के पीछे छुपा था बाहर से लगता सब खुबसूरत है,
मंज़र तो अंदर था जो सहना सके कहना था बहुत कुछ पर चुप रही
Sofiya

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