अगर हम पहले मिले होते,
कैसा होता?
क्या हम आज जैसे हैं वैसे ही होते?
हम साथ चलते, साथ बैठते?
क्या हँसते और बातें करते?
शायद ऐसे ना होते जो आज है
तब वक़्त को मंजूर ना था जो अब होना था
आंसुओं का बहना था, दर्द को महसूस करना था,
मिलने से पहले संभलना भी जरूरी था
अगर हम पहले मिले होते, कैसा होता?
Sofiya
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