कभी कभी सोचती हूँ तुम हो, 
काफ़ी है मेरे दिल के सुकून के लिए,
जब ख्याल आता है के तुम पास नहीं हो,
काफ़ी है मेरी आँखो की नामी के लिए,
हवा का झोंका जब छू जाये,
काफ़ी है के तुम हो यहीं कहीं
एहसास तुम्हारे होने का, काफी है मेरे जीने के लिए।
Sofiya

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