एक है जो चाहता तो नहीं 

 बांध कर ऐसे रखा है

लोग कहे के मोहब्बत करता है

लोगों को क्या पता के ये बाहर का सफेद धागा अंदर से स्याह ज़ंजीर है,

ये तो मोहब्बत नहीं हो सकती,

मोहब्बत तो वो है जो रूह से रूह तक छू जाये,

एक के ग़म देख दूजे की आँखे भर आये,

दर्द की दवा बन जाए,

मेहबूब का हस्ता चेहरा देख वो भी खिल जाए,

खुले आसमान में उड़ने दे,

फूल की तरह खुशबू फेलाने दे,

मोहब्बत बांधना नहीं सुकुन देना चाहे,

दिखावा कर बंधे रखना मोहब्बत नहीं, 

एक है जो चाहता तो नहीं |

Sofiya Nathani 

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