उसने कहा मोहब्बत ना करनी थी

पर ना जाने कब हम मोहब्बत करने लगे

हमे मालूम ना था

होना था जो हो गया, 

 जुड़ ने लगे रूह से रूह तक

उनका मेरी बातों को सुनना, जज्बातों को समझना

दूर रह कर ही सही एहसास को महसूस करना

मुझको मुझसे ही मिलवाना, 

संग हंसना, संग रोना, हर पल साथ रहना

सुकुन जैसे दर्द की दवा बनने लगे

हम बहने लगे उनके संग

ना जाने कब हम मोहब्बत करने लगे

Sofiya Nathani 

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