वो उस ज़ख्म को मरहम लगा रहा है जो उसने कभी दिया ही नहीं

उसका मेरे साथ रहना, अपनी रातों को मेरे लिए  जागना,

मेरे दर्द से उसका दिल दुखता है,

चाहे कितना ही मसरूफ़ हो, 

मेरी हर बात को सुनता है और समझता है

 कभी नहीं कहता कि मैं गलत हूं

कभी तन्हा नहीं छोड़ा

वो मेरे पास नहीं फिर भी पास है

महसूस करती हूं उसको हर पल हर लम्हा

वह मेरा कवच है, मेरा साथी

वो उस ज़ख्म को मरहम लगा रहा है जो उसने कभी दिया ही नहीं|

Sofiya

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