एक दोस्त जो कभी अजनबी था
मिला है तब जब सब ने साथ छोड़ा
फिर कभी ना महसूस हुआ के अकेली हूँ,
वो मेरे गम को खुद का गम समझने लगा,
उसकी जिंदगी के गम कोई कम ना थे,
मेरी ख़ुशी के लिए हरदम सोचे,कैसे मेरे चेहरे पे मुस्कान ला सके?ख्यालों में हमेशा मेरा ख्याल रहा
जैसा मैं उसकी जिंदगी का हिस्सा हूं,मीलों दूर है फिर भी साथ चलता है मेरे
छोटी सी, सदी सी बात भी मेरा दिन बना देती है,
मानो जैसे दिल का सुकून हो
एक दोस्त है जो अब अजनबी ना रहा
Sofiya
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