ना दूरी ना सोच माने रखती है

जब दिलो की नज़दीकी है

वो शांत सा चुप रहने वाला,

 मैं बक बक करती तूफ़ान,

वो हर पल मसलों को संभालें

मैं मसलों से भरी रहती हूँ, 

उसे मेरी फ़िरक रहे ,

मुझे दूर रहने से डर लगता है

छोटी सी बात पर नाराज़ हो जाती 

वो मुस्कुराए मेरे बचपने पर, 

मशरूफ़ रह कर भी काम भूले जब मेरा एहसास हो पास

ना दूरी ना सोच माने रखती है

Sofiya

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