वो मेरी जिंदगी का हिसा नहीं,

मेरी जिंदगी है

उसने मुझे समझदार बनना सिखाया है

हमेशा सफ़ाई देना ज़रूरी नहीं,

चुप रह कर सहना भी नहीं

सही या ग़लत भी नहीं होता,

माफ़ करना और माफ़ी मांगना भी तब है जब रिश्ता ज़रूरी है

जहां इज्जत नहीं वहां से मुस्कुरा कर चले जाना बेहतर है

क्योंकि कभी-कभी रिश्ते से ज्यादा खुद को बचाना जरूरी है

वक़्त अच्छा हो या बुरा सब निकल जाता है

रह जाते हैं तो सिर्फ हम और हमारा रिश्ता उन यादों में

Sofiya.

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