सब्र की बात करते हैं मुझसे
वो क्या जाने सब्र क्या होता है?
बिना मिले, बिना छुए,
बिना मुकम्मल पाए,
चाहा है मैंने,
निभाते हैं साथ पर पास नहीं
सोचो तो जरा आंसू कितने छुपते हैं
उसके दर्द को महसूस करते है,
दर्द मुझे भी होता है
ना कहना मुझसे सब्र कर
तकलीफ़ होती है फिर भी मुस्कुराते रहते हैं
Sofiya
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