वक्त का क्या है?
ये नहीं रुकता, जैसे समंदर की लहर दो कीनारो पे नहीं रुकती
गुज़रता है मानो बहती हवा का झोंका
ना बादशा का रहा ना रंक
वक्त के साथ बदलता कुछ नहीं
लोग बदलते हैं, जीने का तरीका बदलता है
इंसान जीने लगता है उसी दर्द के साथ
ख़ुशियाँ आती हैं पल भर के लिए
फिर वही दिन वही रात
हम जीने लगते हैं उसी वक्त के साथ जो कभी रुकता नहीं
Sofiya
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